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किशोर स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रमों से बढ़ा किशोरों का आत्‍मविश्‍वास

*किशोर स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रमों से बढ़ा किशोरों का आत्‍मविश्‍वास*

-    माहवारी स्‍वच्‍छता स्‍कीम से 3.43 करोड़ किशोरियों को मिले सेनेटरी नैपकिन

-    52.15 लाख किशोरों को मिली क्लिनिकल सलाह, 7947 किशोर क्‍लीनिक खुले

*संतकबीरनगर।*

किशोर स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रमों से किशोरों के अन्‍दर आत्‍मविश्‍वास बढ़ा है। किशोरों के स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी जरुरतों को पूरा करने के लिए जहां विविध योजनाएं चलाई जा रही हैं। वहीं उनके अन्‍दर आत्‍मविश्‍वास पैदा करने के लिए विविध योजनाएं चलाई जा रही हैं। स्‍वस्‍थ युवा ही स्‍वस्‍थ भारत का निर्माण कर सकते हैं, इस बात को ध्‍यान में रखते हुए राष्‍ट्रीय स्‍तर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मन्‍त्रालय के विशेष बुलेटिन के हवाले से जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ ए के सिन्‍हा ने विविध जानकारियां साझा कीं।

*राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके)*

किशोरों के स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए भारत सरकार के इस कार्यक्रम के तहत विविध योजनाएं चलाई जा रही हैं।
*माहवारी स्वच्छता स्कीम* - 3.43 करोड़ किशोरियों को अप्रैल-दिसंबर 2019 के दौरान सैनेटरी नैपकिन प्रदान किए गए।
आयरन गोली वितरण -  3.53 करोड़ किशोरों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम अप्रैल-दिसंबर 2019 के अतिरिक्त *साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड* सप्लीमेंट (डब्ल्यूआईएफएस) कार्यक्रम के तहत हर सप्ताह आईएएफ सप्लीमेंट प्रदान किए गए।
किशोर स्‍वास्‍थ्‍य क्‍लीनिक -  52.15 लाख किशोरों को अप्रैल-दिसंबर 2019 के दौरान किशोर मित्र स्वास्थ्य क्लीनिक (एएफएचसी) में सलाह और निदान सेवाएं दी गईं। मार्च 2019 में एएफएचसी की संख्या 7,470 से बढ़कर सितंबर 2019 में 7,947 हो गई।
पीयर एजूकेटर्स कार्यक्रम -  अप्रैल-दिसंबर 2019 की अवधि में पीयर एजुकेटर्स प्रोग्राम लागू करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई। इस अवधि में 91,290 पीयर एडुकेटर चुने गए और 38,898 पीयर एजुकेटरों के प्रशिक्षण के साथ चुने गए पीयर एडुकेटरों की कुल 3.45 लाख हो गई।
- अप्रैल -दिसंबर 2019 के दौरान 60,474 किशोर स्वास्थ्य दिवस (एएचडी) मनाए गए। यह किशोर स्वास्थ्य मुद्दों और उपलब्ध सेवाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्राम स्तर की त्रैमासिक गतिविधि है।
*एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) कार्यक्रम:* भारत सरकार ने प्रधानमंत्री सर्वव्यापी संपूर्ण पोषण अभियान के तहत एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) की रणनीति लागू की है और एनीमिया में प्रति वर्ष 3 प्रतिशत कमी करने का लक्ष्य रखा है। एएमबी के तहत 6 गुणे 6 गुणे 6 रणनीति के तहत छह आयुवर्ग, छह प्रयास और छह संस्थागत व्यवस्था की गई है। यह रणनीति आपूर्ति श्रृंखला , मांग पैदा करने और मजबूत निगरानी पर केंद्रित है। इस उद्देश्य से पोषण और गैर-पोषण दोनों कारणों से होने वाली एनीमिया दूर करने के लिए डैशबोर्ड का उपयोग किया गया है।
*एएमबी की रणनीति के तहत लोगों के छह आयुवर्ग हैं।*
1- शिशु (6-59 महीने)
2- बच्चे (5-9 वर्ष)
3- किशोरियां और किशोर (10-19 वर्ष)
4- गर्भवती महिलाएं
5- स्तनपान कराने वाली महिलाएं
6- प्रजनन आयुवर्ग की महिलाएं (डब्ल्यूआरए) (15-49 वर्ष)

*एनीमिया मुक्‍त भारत अभियान में अब तक की प्रगति -*

(अप्रैल-दिसंबर, 2019-एचएमआईएस आंकड़े 21 फरवरी 2020 तक)
1- आयु 10-19 वर्ष (स्कूल से बाहर लड़कियों) के 4.70 करोड़ बच्चों को आईएफए नीली गोलियां दी गईं। (हर महीने औसत 52.32 लाख स्कूल से बाहर लड़कियों को आईएफए नीली गोलियां दी गईं)
2- 1.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 95.18 लाख§ स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 180 आईएफए लाल गोलियां दी गईं। (हर महीने औसत 22.10 लाख गर्भवती महिलाओं और 10.57 लाख स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आईएफए लाल गोलियां दी गईं)
3- 6-59 माह के आयु वर्ग के 14.26 करोड़ बच्चों को आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) सीरप प्रदान किया गया (हर महीने औसत 1.58 करोड़ बच्चों को आईएफ सीरप दिया गया)
4- आयुवर्ग 5-9 वर्ष (स्कूल में) के 21.29 करोड़ बच्चों को गुलाबी गोली प्रदान की गई। (हर महीने औसत 2.36 करोड़ स्कूल के अंदर बच्चों को गुलाबी गोली दी गई)
5- आयुवर्ग 5-9 वर्ष (स्कूल से बाहर) के 1.98 करोड़ बच्चों को गुलाबी गोलियां प्रदान की गईं। (हर महीने औसत 22.06 लाख स्कूली बच्चों को गुलाबी गोलियां दी गईं)
6- आयु वर्ग 10-19 वर्ष के 36.06 करोड़ बच्चों (स्कूल में)  को आईएफए नीली गोलियां दी गईं। (हर महीने स्कूल में औसत 4 करोड़ बच्चों को नीली गोलियां दी जाती हैं )


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