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मातृ, शिशु, बाल मृत्‍युदर और बीमारियों को भी कम कर रहा है परिवार नियोजन

*मातृ, शिशु, बाल मृत्‍युदर और बीमारियों को भी कम कर रहा है परिवार नियोजन*

संतकबीर नगर ( समीप श्रीवास्तव)
-    त्रैमासिक इंजेक्‍शन अन्‍तरा व छाया के रुप में महिलाओं को मिले अधिक विकल्‍प

-    उच्‍च फर्टिलिटी रेट वाले 146 जनपदों में चलाया जा रहा है मिशन परिवार विकास



राष्‍ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के बारे में स्‍वास्‍थ्‍य मन्‍त्रालय के विशेष बुलेटिन के हवाले से एसीएमओ आरसीएच व परिवार कल्‍याण के नोडल डॉ मोहन झा ने बताया कि परिवार नियोजन नीति और वास्तविक कार्यक्रम क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से बड़े बदलाव के दौर में है और इसकी नई प्रस्तुति का मकसद न केवल जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्यों को प्राप्त करना है, बल्कि प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और मातृ, शिशु और बाल मृत्यु दर और बीमारी भी कम करना है। इस कार्यक्रम के तहत मंत्रालय स्वास्थ्य व्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर परिवार नियोजन की विभिन्न सेवाएं प्रदान करता है और हाल ही में महिलाओं के लिए उपलब्ध विकल्पों का भी विस्तार किया गया है।
*प्रसव के बाद आईयूसीडी (पीपीआईयूसीडी):* वित्त वर्ष 2019-20 (जनवरी, 2020 तक) कुल 19,44,495 पीपीआईयूसीडी लगाने की रिपोर्ट दर्ज की गई। पीपीआईयूसीडी स्वीकृति दर 16.5 प्रतिशत रही है।
*गर्भनिरोधक सुई एमपीए (अंतरा प्रोग्राम)*: वित्त वर्ष 2019-20 (जनवरी, 2020 तक) पूरे देश में कुल 15,58,503 डोज़ दिए गए हैं।
*गैर-हार्मोनल गोली सेंटक्रोमैन (छाया) -* वित्त वर्ष 2019-20 (जनवरी, 2020 तक) में सेंट्रोक्रोमन की कुल 14,05,607 स्ट्रिप्स देने की रिपोर्ट दर्ज की गई हैं।
मिशन परिवार विकास (एमपीवी) - 3 और उससे अधिक कुल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) वाले 7 अधिक ध्यान देने वाले राज्यों के उच्च फर्टिलीटी रेट वाले 146 जिलों में गर्भ निरोधक और परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए नवंबर 2016 में एमपीवी शुरू किया गया था। ये जिले उत्तर प्रदेश (57), बिहार (37), राजस्थान (14), मध्य प्रदेश (25), छत्तीसगढ़ (2), झारखंड (9) और असम (2) के हैं, जो देश का 44 प्रतिशत हिस्सा है। वित्त वर्ष 2019-20 (अप्रैल से दिसंबर 2019 की अवधि) में एमपीवी के अंतर्गत प्रदर्शन इस प्रकार रहा।
*पीपीआईयूसीडी लगाने की संख्या* - 4.66 लाख
*सास-बहू समेलनों की संख्या* - 1.3 लाख
*आशा द्वारा वितरित नई पहल किट की संख्या* - 2.5 लाख

*पीसी-पीएनडीटी से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर लगी रोक*

·         गर्भधारण-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 भारत का संसदीय कानून है जो कन्या भ्रूण हत्या और भारत में गिरते लिंग अनुपात रोकने के लिए लागू किया गया है।

·         पीसी एवं पीएनडीटी एक्ट, 1994 के तहत केंद्रीय पर्यवेक्षक बोर्ड (सीएसबी) का पुनर्गठन किया गया है। 11 अक्टूबर, 2019 को 27 वीं सीएसबी बैठक की गई।

·         राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (क्यूपीआर) सितंबर 2019 के अनुसार पीसी एवं पीएनडीटी एक्ट के तहत 67,084 निदान केंद्र के नाम दर्ज किए गए। इस कानून के उल्लंघन के लिए अब तक कुल 2,220 मशीनें सील और जब्त की गई हैं।

·         कानून के तहत जिला के उपयुक्त अधिकारियों ने अदालतों में कुल 3,057 मामले दायर किए गए हैं और अब तक 607 दोषियों पर आरोप तय किए जा चुके हैं। आरोप तय होने के बाद 142 डॉक्टरों के मेडिकल लाइसेंस निलंबित / रद्द कर दिए गए हैं।

·         वित्त वर्ष 2019-20 (नवंबर 2019 तक) में तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और झारखंड सहित विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय निरीक्षण एवं निगरानी समिति (एनआईएमसी) के 9 दौरे हुए हैं।

·         वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 9 राज्यों - बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में जिला के उपयुक्त अधिकारियों और पीएनडीटी नोडल अधिकारियों के लिए क्षमता विकास कार्यशालाएं आयोजित की गईं।

·         राष्ट्रीय न्यायिक अकादेमी के माध्यम से न्यायपालिका को इस दिशा में उन्मुख और संवेदनशील बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी ने इस वर्ष 11 राज्यों को शामिल कर 35 जिला न्यायाधीशों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।

·         पीसी एवं पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट पर लिंग-चयन के विज्ञापन पर रोकथाम और निगरानी के उद्देश्य से मंत्रालय नोडल एजेंसी के माध्यम से सक्रियता से कार्यवाही कर रहा है। मंत्रालय ने जनवरी से जून 2019 तक इंटरनेट से ऐसे विज्ञापन हटाने के लिए सर्च इंजनों को कुल 577 शिकायतें भेजीं।

·         वित्त वर्ष 2019-20 (नवंबर 2019 तक) में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम सहित 22 राज्यों के लिए कार्यक्रम की समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं।


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