जिंदगी को जन्नत बनाना या जहन्नुम अब हमारे हाथों में-डॉ.अमरनाथ पांडेय
ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान जीवन है।इसे जन्नत बनाना है या और जहन्नुम यह हमारे हाथ में है उक्त बातें एच. आर.पी.जी. कालेज के हिंदी विभाग से डॉ अमरनाथ पांडेय ने कही है उन्होंने आगे कहा कि मानव जीवन और इस जगत का संबंध अत्यंत अनमोल और देवदुर्लभ है। आज कोरोना संकट के दौर में इसकी महत्ता स्वप्रमाणित हो गई है। कोरोना ने जन्नत स्वरूप हमारी पृथ्वी के अनेक हिस्सों को जहन्नुम बना दिया है,अगर हम नही सम्भले तो संभवतः आगे हमारी दशा भी कुछ वैसी ही हो सकती है।लॉकडाउन 4 को हमनें बहुत हल्के में लिया, अपनी जिम्मेदारी को भी दूसरों पर थोप दिया। लॉकडाउन 1,2 और 3 की तरह हमने लॉकडाउन के चतुर्थ चरण में सरकारी दिशानिर्देशों पर गंभीरता से अमल ही नहीं किया।कुछ जिम्मेदार देशवासियों को छोड़ दिया जाय तो अमूमन हमने अपनी नैतिकता का त्याग कर दिया। कोरोना संक्रमण आज विकराल रूप धारण कर चुका है, प्रतिदिन 5 से 6 हजार लोग इसके जद में आ रहे है,यहाँ तक कि हमारे कोरोना वारियर्स भी बड़ी संख्या में संक्रमित हो रहे है। जरा सोचें यदि हमारे डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिस प्रशासन के लोग ही संक्रमित हो गए तो हमारी सुरक्षा कौन करेगा। हमें अपने घर परिवार, समाज, देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है अन्यथा हमारा वजूद मिटने से कोई रोक नहीं सकता।
न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्तां वालो,