अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा दूरभाष पर आयोजित हुआ गोष्ठी
"बौद्ध पौर्णिमायाः शुभाशयाः"
अखिल भारतीय साहित्य परिषद -गोरक्षप्रान्त , संतकबीरनगर इकाई द्वारा बुद्धपूर्णिमा के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन दूरभाष पर सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर "आत्मदीपो भव"की कामना की गई।
साहित्य परिषद संतकबीरनगर इकाई के महामंत्री डॉ अमरनाथ पाण्डेय ने कहा कि बुद्धपूर्णिमा बौद्ध धर्म और सनातन भारतीय संस्कृति की आस्था का पर्व है।महात्मा बुद्ध स्वयं भगवान श्रीहरि विष्णु के नवम अवतार माने जाते है।आज उनके जन्मोत्सव पर हम सभी विश्व के सम्पूर्ण मंगल की कामना करते है।
कोरोना संकट के इस विकट समय में हम उनके विचारों द्वारा कोरोना महामारी से लड़ने में सक्षम हो सकते हैं।
साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ अमित भारती ने कहा कि आज के दिन जिस प्रकार हम स्वयं को स्वच्छ रखने का कार्य करते है उसी प्रकार यह पहल भी करे कि हम समाज को भी स्वच्छ रखें। बुद्धपूर्णिमा के इस आध्यात्मिक पर्व पर बुद्ध के संदेशों द्वारा ही हम इस वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ सकते हैं।
आज के दिन हम गरीब और जरूरत मन्दो को भोजन एवं वस्त्र प्रदान करते है साथ ही पशु पक्षियों की सेवा भी करते है।यदि हमारे घर में कोई पक्षी कैद हो तो उसे आजाद किया जाता है।उक्त सभी कार्य मानवता की स्थापना के लिए किया जाता हैं।
इस अवसर पर साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष डॉ अनुपमपति त्रिपाठी ने कहा कि बौद्धपुर्णिमा के इस महान पर्व पर हमें आपसी कलह से बचते हुए विश्व शान्ति की कामना करने के साथ ही महात्मा बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।