"अनुशासन और आत्मनिर्भरता का उद्योग भी योग"
वैश्विक महामारी कोरोना से आज पूरा विश्व त्रस्त है,इस अदृश्य विषाणु ने लाखों लोगों की जान लेकर अपनी क्रूरता का परिचय
भी दे दिया है।हम भी कुछ हद तक अब सतर्क हो गए है और लड़ भी रहे है।कोरोना संकट ने हमारी जीवनशैली को पूर्णतः प्रभावित किया है,फिर भी हम बदलाव को स्वीकार कर आगे बढ़ रहे है।इससे बचाव के उपाय स्वच्छता और सामाजिक दूरी को हमने अपने जीवनशैली में ढाल लिया है।
भारतीय संस्कृति,प्रकृति,परिवेश,संसाधन पर निर्भरता ही हमारी असल पूंजी है हमें अपने को इसमें ही निवेशित करना है।योग भारतीय संस्कृति की अमृतनिधि है,योग द्वारा ही हम निरोग को धारण कर सकते है।योग दिवस पर विभिन्न प्रकार के,विविध विषयों के योग हम और विश्व करते आ रहे है।हम भारतीयों को अब योग को अपने दैनिक चर्या में शामिल करना होगा साथ ही आत्मनिर्भरता और अनुशासन का योग भी सुनियोजित ढंग से योजित करना होगा।
योग सकल संसाधनों की प्राप्ति का नाम है।दैहिक,दैविक, भौतिक सभी सुख योग में निहित है बस हमें साधनों को साधने योग आना चाहिए।आज के परिवेश में हमारी सबसे बड़ी बीमारी परनिर्भरता है जिसने हमे कमजोर और लाचार बना दिया है।इस परनिर्भरता रूपी बीमारी का इलाज आत्मनिर्भरता रूपी योग है।आइए अनुशासन और आत्मनिर्भरता के योग से इस योग दिवस पर अपनी प्राचीन गौरव और शक्ति को प्राप्त करते हैं।