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प्रेम और दया की मूर्ति - मदर टेरेसा

प्रेम और दया की मूर्ति - मदर टेरेसा 


राजकीय कन्या इंटर कॉलेज खलीलाबाद संत कबीर नगर की शिक्षिका सोनिया ने बताया कि मदर टेरेसा मानवता की जीती जागती मिसाल थी और उनका नाम लेते ही मन मस्तिष्क में मां के प्रेम की भावनाएं उमड़ने लगती हैं मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन दीन दुखियों की सेवा में व्यतीत कर दिया दुनिया में ऐसे ही महान लोगों की जरूरत है जो मानवता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म समझते हैं उनके कार्य को एक मिसाल की तरह जाना जाता है मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को मेसिडोनिया की राजधानी स्कोपजे शहर में हुआ। उनके पिता का नाम निकोला बोयाजू था । इन्हें पढ़ना गीत गाना बेहद पसंद था और उन्हें अनुभव हो गया था कि वह अपना सारा जीवन मानव सेवा में लगाएंगी और उन्होंने पारंपरिक वस्त्रों को त्याग कर नीली किनारे वाली साड़ी पहनने का फैसला लिया और तभी से मानवता की सेवा के लिए कार्य करना आरंभ कर दिया वह स्वयं को ईश्वर की समर्पित सेवक मानती थी जिनको धरती पर झोपड़ पट्टी समाज के गरीब, असहाय, तथा पीड़ित लोगों की सेवा के लिए भेजा गया था मदर टेरेसा आयरलैंड से  6 जनवरी 1929 को कोलकाता में "लोरेटो कान्वेंट" पहुंची इसके बाद मदर टेरेसा ने पटना के होली फैमिली हॉस्पिटल से आवश्यक नर्सिंग ट्रेनिंग पूरी की। 1948 में वापस कोलकाता आ गई। 1948 में उन्होंने वहां के बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल खोला और बाद में "मिशनरीज आफ चैरिटी" की स्थापना की जिसे 7 अक्टूबर 1950 को रोमन कैथोलिक चर्च ने मान्यता दी। मदर टेरेसा की मिशनरीज संस्था ने 1996 तक तकरीबन 125 देशों में 755 निराश्रित गृह खोलें जिसमें तकरीबन पांच लाख   लोगों की भूख मिटाई जाने लगी  मदर टेरेसा ने "निर्मल हृदय" और " निर्मला शिशु भवन "नाम के खोलें और निर्मल हृदय   आश्रम का काम बीमारी से पीड़ित लोगों की सेवा करना था ।और वही निर्मला शिशु भवन की स्थापना तथा बच्चों की सहायता के लिए था बेघर बच्चों की सहायता के लिए व्यवस्था की और वहां पर पीड़ित रोगियों तथा गरीबों की स्वयं सेवा करती थी ऐसे बेसहारा लोगों की सेवा के लिए मदर टेरेसा ने बहुत कष्ट उठाए मदर टेरेसा का मिशन सत्य पर आधारित था उन्होंने मानवीय सेवा सहजता से की इन्होंने दुखी तथा पीड़ित व्यक्तियों की सेवा साधना में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। वह एक विशेष सामाजिक सेवा थी मदर टेरेसा ने इसे एक गॉड गिफ्ट कहा उन्हें भारत सरकार ने भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया था उनका कार्य भविष्य के लिए प्रेरणादायक था जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं उन्होंने जो कुछ भी किया वह इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया आज जब वह हमारे बीच नहीं है फिर भी पूरी दुनिया में उनकी जिंदादिली के लिए उन की मिसाल दी जाती है समाज सेवा तथा मानव सेवा के क्षेत्र में उन्होंने जो किया वह शायद ही कोई कर पाए दुनिया में हर कोई सिर्फ अपने लिए जीता है पर मदर टेरेसा जैसे लोग सिर्फ दूसरों के लिए जीते हैं मदर टेरेसा ने भारत में विकलांग और असहाय बच्चों तथा सड़क किनारे पड़े असहाय लोगों की दयनीय स्थिति को अपनी आंखों से देख कर वापस जाने का साहस नहीं कर सकी उन्होंने भारत में रुक कर जनसेवा करने का प्रण कर लिया जिसका उन्होंने जीवन भर पालन किया। मदर टेरसा ने  हत्या के विरोध में सारे विश्व में अपना रोज तरसाते हुए अनाथ हूं मवाद संतानों को अपना कर्म आत्मा तृप्त सुख प्रदान किया उन्होंने फुटपाथ पड़े हुए रोते से सकते रोगी तथा महाराणा हसन असहाय रखते को उठाया और अपने सेवा केंद्र में उनका उपचार का स्वस्थ बनाया दुखी मानवता की सेवा ही उनका जीवन व्रत था आज मदरसा हमारे बीच नहीं है पर उनकी मिशनरी आज भी देश में समाज सेवा के कार्यों में लगी हैंआज भी पूरे विश्व में ऐसे महान लोगों की आवश्यकता है जो मानवता को सबसे बड़ा धर्म समझे और मानव कल्याण की लिए आगे  मदर टेरेसा से प्रेरणा लेकर हम भी अपना पूरा जीवन समाज सेवा में  समर्पित है

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