हाथरस की घटना सुनकर स्तब्ध हूँ,और एक भय भी मन में है आखिर ऐसी जघन्य घटनाएं क्यो और कबतक होंगी ।
क्या लड़कियों को जीने का अधिकार नही है , क्या कदम कदम पर हम लड़कियों को समाज मे डर के साये में जीना होगा ?
सिर्फ लड़कियों को दोष देकर या ये कहकर की उनके साथ जो हो रहा है , उसके लिए वो भी दोषी है इसी से इतिश्री हो जाएगा? नही कभी नही क्या इस मानवता को शर्मशार करने वाली घटनाएं नही रुकेंगी?
आज आवश्यकता इस बात की है की हर माता - पिता अपने बेटों को लड़कियों का सम्मान करना सिखाए, उन्हें बताये की केवल खुद की मां और बहन ही सम्मान के योग्य नही बल्कि आपका पुरुसत्व इसी में है जब आप संपूर्ण नारी शक्ति को सम्मान दे। सिर्फ प्रशासन और सरकारी तंत्र की आलोचना करने से चीजें सही नही हो जाएंगी। परिवार ही बच्चे की प्रथम पाठशाला है और वही से उसे संस्कार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा मिलती है ,तो आवश्यकता इस बात की है की बचपन में ही नयी पीढ़ी में ऐसे जीवन आदर्श विकसित किए जाये ताकि वो आगे चलकर ऐसे जघन्य कृत्यों को करने से पहले सौ बार सोचे, नही तो ऐसी घटनाये होती रहेंगी और ना जाने कितनी निर्भया अपने सपनो को पूरा करने की उम्र में दुनिया छोड़ कर जाती रहेंगी।कुछ दिनों के बाद ही नवरात्रि का पर्व प्रारम्भ होगा और देश में पूरी आस्था और विश्वाश से पूरे नौ दिन शक्ति की देवी माँ दुर्गा की आराधना होगी ।
नवरात्रि में घरो में कन्या पूजन होगा।पर हमारे समाज के लोगों को ये कब समझ आयेगा की समाज की हर कन्या में माता रानी का वही स्वरूप है ,हर बेटी में माँ दुर्गा है।
एक तरफ हमारी भारतीय संस्कृति हमें नारी सम्मान सिखाती है, तो दूसरी तरफ हम में से बहुत से लोग नारी को आज भी सिर्फ उपभोग की वस्तु समझते हैं।
सिर्फ कानून बनाने से कुछ नही होगा ,मानसिकता बदलनी होगी शायद तभी ऐसी घटनाये रुके!!
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●- ज्योति पांडेय