अदम्य साहसी दुर्गा भाभी के त्याग व साहस को नमन- मनमोहन श्री.(काजू)
भाजपा के युवा नेता व समाजसेवी तथा जनपद के जाने माने अधिवक्ता श्री मनमोहन श्रीवास्तव उर्फ काजू ने क्रांतिकारी दुर्गा भाभी के जयंती पर उन्हें नमन किया है।
अधिवक्ता श्री काजू ने बताया कि भारत के इतिहास में तमाम ऐसे उदाहरण मौजूद है जिन्होंने अपने साहस व हिम्मत के दम पर अंग्रेज हुक़ूमत के दाँत खट्टे कर दिए थे। इन्ही क्रांतिकारियों में दुर्गा भाभी का नाम भी जानाजाता है जिन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय देकर इतिहास के पन्नो में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवा लिया।
वीरांगना दुर्गा भाभी के बारे में बताते हुए श्री काजू कहते है कि
दुर्गा भाभी का जन्म सात अक्टूबर 1902 को शहजादपुर ग्राम अब कौशाम्बी जिला में पंडित बांके बिहारी के यहां हुआ। इनके पिता इलाहाबाद कलेक्ट्रेट में नाजिर थे ।
आगे वो बताते है कि जब साथी क्रांतिकारियों के शहीद हो गए तो दुर्गा भाभी एकदम अकेली पड़ गई। वह अपने पांच वर्षीय पुत्र शचींद्र को शिक्षा दिलाने की व्यवस्था करने के उद्देश्य से वह साहस कर दिल्ली चली गई। जहां पर पुलिस उन्हें बराबर परेशान करती रहीं। दुर्गा भाभी उसके बाद दिल्ली से लाहौर चली गई, जहां पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और तीन वर्ष तक नजरबंद रखा। फरारी, गिरफ्तारी व रिहाई का यह सिलसिला 1931 से 1935 तक चलता रहा। अंत में लाहौर से जिलाबदर किए जाने के बाद 1935 में गाजियाबाद में प्यारेलाल कन्या विद्यालय में अध्यापिका की नौकरी करने लगी और कुछ समय बाद पुन: दिल्ली चली गई और कांग्रेस में काम करने लगीं। कांग्रेस का जीवन रास न आने के कारण उन्होंने 1937 में छोड़ दिया। 1939 में इन्होंने मद्रास जाकर मारिया मांटेसरी से मांटेसरी पद्धति का प्रशिक्षण लिया तथा 1940 में लखनऊ में कैंट रोड के (नजीराबाद) एक निजी मकान में सिर्फ पांच बच्चों के साथ मांटेसरी विद्यालय खोला। आज भी यह विद्यालय लखनऊ में मांटेसरी इंटर कालेज के नाम से जाना जाता है। 14 अक्टूबर 1999 को गाजियाबाद में उन्होंने सबसे नाता तोड़ते हुए इस दुनिया से अलविदा कर लिया।
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